Thursday, 26 February 2015

1290_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



चाहे करोड़ों सूर्य का प्रलय हो जाये, चाहे असंख्य चन्द्रमा पिघलकर नष्ट हो जायें परंतु ज्ञानी महापुरुष अटल एवं अचल रहते हैं |

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Wednesday, 25 February 2015

1289_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

सरलता, स्नेह, साहस,
धैर्य, उत्साह एवं तत्परता
जैसे गुणों से सुसज्जित तथा
दृष्टि को 'बहुजनहिताय....
बहुजनसुखाय....' बनाकर सबमें
सर्वेश्वर को निहारने से ही आप
महान बन सकोगे।

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Tuesday, 24 February 2015

1288_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



जिसके जीवन में
समय का मूल्य नहीं,
कोई उच्च लक्ष्य नहीं, उसका
जीवन बिना स्टियरींग की गाड़ी
जैसा होता है। साधक अपने
एक-एक श्वास की कीमत
समझता है, अपनी हर चेष्टा का
यथोचित मूल्यांकन करता है।

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Sunday, 22 February 2015

1287_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



हिलनेवाली, मिटनेवाली
कुर्सियों के लिए छटपटाना
एक सामान्य बात है, जबकि
परमात्मप्राप्ति के लिए छटपटाकर
अचल आत्मदेव में स्थित होना
निराली ही बात है।
यह बुद्धिमानों का काम है।

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Tuesday, 30 December 2014

1286_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



~~~~ मधुर व्यवहार ~~~
असत्य, निंदा, चुगलखोरी और कठोरता - यह वाणी के पाप हैं ।

हित, मिट, शांत, मधुर और प्रिय भाषण - यह पाँच वाणी के गुण हैं ।

आप अमानी रहो । औरों को मान दो ।

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Monday, 22 December 2014

1285_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जिस समय जो काम करो, बड़ी सूक्ष्मदृष्टि से करो, लापरवाही नहीं, पलायनवादिपना नहीं। जो काम करो, सुचारू रूप से करो। बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय काम करो। कम-से-कम समय लगे और अधिक से अधिक सुन्दर परिणाम मिले इस प्रकार काम करो। ये उत्तम कर्त्ता के लक्षण हैं।

 -Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Thursday, 11 December 2014

1284_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

मन को उदास मत करो। सदैव प्रसन्नमुख रहो। हँसमुख रहो। तुम आनन्दस्वरूप हो। भय, शोक, चिन्ता आदि ने तुम्हारे लिए जन्म ही नहीं लिया है, ऐसी दृढ़ निष्ठा के साथ सदैव अपने आत्मभाव में स्थिर रहो।

 -Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu



Wednesday, 10 December 2014

1283_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



 ईश्वर का स्मरण करते-करते काम करो। इसकी अपेक्षा काम ईश्वर का समझकर तत्परता से करो यह श्रेष्ठ है।जिस समय जो शास्त्र अनुमोदित काम करते हो उसमें तत्पर हो जाओ।
-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Tuesday, 9 December 2014

1282_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



गुणग्राहि बने..

"हे रामजी ! संत में एक भी सदगुण दिखे तो लाभ ले लें। उनमें दोष देखना और सुनना अपने को मुक्तिफल से वंचित करके अशांति की आग में झोंकने के बराबर है।

'श्री योगवाशिष्ठ महारामायण'

Thursday, 27 November 2014

1281_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

...सब हानि-लाभ समान है

निजानंद में मग्न आत्मज्ञानी संत पुरुषों को भला निंदा-स्तुति कैसे प्रभावित कर सकती है? वे तो सदैव ही उस अनंत परमात्मा के अनंत आनंद में निमग्न रहते हैं। वे महापुरुष उस पद में प्रतिष्ठित होते हैं जहाँ इन्द्र का पद भी छोटा हो जाता है।


इन्द्र का वैभव भी तुच्छ समझने वाले ऐसे संत, जगत में कभी-कभी, कहीं-कहीं, विरले ही हुआ करते हैं। समझदार तो उनसे लाभ उठाकर अपनी आध्यात्मिक यात्रा तय कर लेते हैं, परंतु उनकी निंदा करने-सुनने वाले तथा उनको सताने वाले दुष्ट, अभागे, असामाजिक तत्त्व कौन सी योनियों में, कौन सी नरक में पच रहे होंगे यह हम नहीं जानते। ॐ

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Video Gallery ( MuSt WaTcH )

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