Wednesday, 27 July 2016

1463_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

अति नींद करने वाला, जड़, स्थूलकाय, निष्क्रिय, आलसी एवं मूर्ख मन का शिष्य गुरू संतुष्ट हों, इस प्रकार उनकी सेवा नहीं कर सकता।जिस शिष्य में उपदेश के आचरण का गुण होता है वह अपने गुरू की सेवा में सफल होता है। आबादी एवं अमरत्व उसको आ मिलते है।

--Shri Sivananda Saraswati

Tuesday, 26 July 2016

1462_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जैसे भगवान निर्वासनिक हैं, निर्भय हैं, आनन्दस्वरूप हैं, ऐसे तुम भी निर्वासनिक और निर्भय होकर आनन्द में रहो। यही उसकी महा पूजा है।

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Monday, 25 July 2016

1461_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

भगवन कहते हैं: जैसे कोई व्यक्ति आँखों में शूल नहीं भोंकना चाहता ऐसे ही समझदार व्यक्ति अपने आप को विषयों के शूल नहीं भोंकना चाहता। जैसे कोई भी समझदार मनुष्य अपने भोजन में विष नहीं डालना चाहता, ऐसे ही हे उद्धव !जिज्ञासु व्यक्ति अपने जीवन में विषयों का विष नहीं डालना चाहता।

Sunday, 24 July 2016

1457_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

>>>समाहित चित्त<<<

ज्ञानी का राग तो संसार में है नहीं। उसका राग तो परमात्मा में है और परमात्मा सब जगह मिलते हैं, परमात्मा सर्वत्र मौजूद हैं, परमात्मा ज्ञानी का अपना आपा होकर बैठे हैं। इसलिए ज्ञानी को कोई भी सासांरिक परिस्थिति का राग नहीं है। राग नहीं है तो द्वेष भी नहीं है। राग द्वेष नहीं है तो उसका चित्त सदा समाहित है।

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Saturday, 23 July 2016

1456_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जैसे स्वप्न-जगत जाग्रत होने के बाद मिथ्या लगता है वैसे ही यह जाग्रत जगत अपने आत्मदेव को जानने से मिथ्या हो जाता है। जिसकी सत्ता लेकर यह जगत् बना है अथवा भासमान हो रहा है उस आत्मा को जान लेने से मनुष्य जीवन्मुक्त हो जाता है।गहरी वास्तविकता में तुम आत्मा हो, ईश्वर हो, सर्वशक्तिमान हो। सतगुरु यह सत्य तुम्हारे जीवन में प्रगट होने की प्रतीक्षा कर रहें है।

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Thursday, 21 July 2016

1454_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

उठ जाओ और वैराग्य का आश्रय लो। जैसे साईकल के पहिए निकाल दो तो साईकल चलना मुश्किल है ऐसे ही जीवन से अभ्यास और वैराग्य हटा दो तो प्रभु की यात्रा होना मुश्किल है।

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Wednesday, 20 July 2016

1453_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU


कह रहा है आसमाँ यह समाँ कुछ भी नहीं ।
रोती है शबनम कि नैरंगे जहाँ कुछ भी नहीं ..
जिनके महलों में हजारों रंग के जलते थे फानूस ।
झाड़ उनकी कब्र पर है और निशाँ कुछ भी नहीं ..
जिनकी नौबत से सदा गूँजते थे आसमाँ ।
दम बखुद है कब्र में अब हूँ न हाँ कुछ भी नहीं ..
तख्तवालों का पता देते हैं तख्ते गौर के ।
खोज मिलता तक नहीं वादे अजां कुछ भी नहीं ..

Monday, 18 July 2016

1452_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोsस्तु ते।।

हे आदिदेव सूर्यनारायण! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। हे प्रकाश प्रदान करने वाले देव! आप मुझ पर प्रसन्न हों। हे दिवाकर देव! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। हे तेजोमय देव! आपको मेरा नमस्कार है।
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