DIVYA BAPU JI ( WALLPAPERS )

Tuesday, 30 September 2014

1252_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

सुख-दुःखों की बौछारें होती रहें परन्तु वे आत्मज्ञानी को अपने स्वरूप से कभी विचलित नहीं कर सकतीं। 
-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Monday, 22 September 2014

1251_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



हजार बार असफल होने पर भी फिर से पुरुषार्थ कर, अवश्य सफलता मिलेगी। हिम्मत न हार। छोटा-छोटा नियम, छोटा-छोटा संयम का व्रत जीवन में लाते हुए आगे बढ़ और महान हो जा।
-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Sunday, 21 September 2014

1250_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU




व्यवहार जगत के तूफान तो क्या, मौत का तूफान आये उससे भी टक्कर लेने का सामर्थ्य आ जाय इसका नाम है साक्षात्कार। इसका नाम है मनुष्य जीवन की सफलता।
-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Saturday, 20 September 2014

1249_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

एकाग्रता और अनासक्ति ये – दो हथियार जिसके पास आ जायें, वह अनपढ़ हो चाहे साक्षर हो, धनवान हो चाहे निर्धन हो, सुप्रसिद्ध हो चाहे कुप्रसिद्ध हो, वह ब्रह्म-परमात्मा में टिक सकता है।
-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Tuesday, 16 September 2014

1248_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



वक्षस्थल में जो ‘मै‘ का घुन लगा हुआ है । उसे परे फेंक दो और सारा संसार तुम्हारे सामने नत मस्तक होगा ।
-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Monday, 15 September 2014

1247_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



अपने आप को सदैव पूर्ण शांत और आनंद मग्न रखो । चाहे जैसी घटना हो उसमे व्याघात नही होना चाहिये ।भूख-प्यास ,रोग ,दुःख ,अपमान और मृत्यु ।सदैव प्रसन्नचित्त और शांत रहो ,क्योंकि तुम परमात्मा के अंश हो,परम तत्व हो ।

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Saturday, 13 September 2014

1246_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



जिसको आप भयानक घटनायें और भयंकर चोटें अनुमान किये बैठे हो ,वह वास्तव में तो तुम्हारे प्रियतम आत्मदेव ही की करतूतें है । सबकी सब डरावनी बातें और प्राण नाशक घटनायें रूप और आकार तो विष का रखती है मगर बनी हुयी मिश्री की हैं ।
-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Wednesday, 10 September 2014

1245_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

कर्मयोगी गंगा की तरह कर्म करता है और ज्ञानी हिमालय की तरह । अर्थात मनुष्य के कर्म में भाव की प्रधानता होती है और ज्ञानी के कर्म मे ज्ञान की प्रधानता होते है या ज्ञान ही ज्ञान होता है ।
-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Tuesday, 9 September 2014

1244_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU


हम सबकी फिक्र करने वाला इश्वर बैठा है । तब यह बोझा व्यर्थ ही हम क्यों ढोते फिरें ? हमें तो अपने हिस्से आया हुआ काम करते रहना है ।
-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Sunday, 7 September 2014

1243_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

यदि लौकिक आसक्तियों और स्वार्थमयी इच्छाओं से आप अपने को आजाद कर लें ,सो फिर सत्य पाने की बात ही क्या है ? आप स्वंय इसी क्षण सत्य हैं ।
-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

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