Wednesday, 4 May 2016

1437_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

~~~~ नित्यावतार ~~~~

परमात्मा के नित्यावतारूप ज्ञानी महात्मा के दर्शन तो कई लोगों को हो जाते है लेकिन उनकी वास्तविक पहचान सब को नहीं होती, इससे वे लाभ से वंचित रह जाते हैं। 
महात्मा के साक्षात्कार के लिए हृदय में अतुलनीय श्रद्धा और प्रेम के पुष्पों की सुगन्ध चाहिए।

Tuesday, 3 May 2016

1436_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

~~~~ आ शांत शीतल देश में ~~~~

संसार जलती आग है, इस आग से झट भाग कर। आ शांत शीतल देश में, हो जा अजर ! हो जा अमर !!

पृथिवी नहीं जल भी नहीं, नहीं अग्नि तू नहीं है पवन। आकाश भी तू है नहीं, तू नित्य है चैतन्यघन॥

इन पाँचों का साक्षी सदा, निर्लेप है तू सर्वपर। निजरूप को पहिचानकर, हो जा अजर ! हो जा अमर!!



Monday, 2 May 2016

1435_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU



~~~~ सच्चा सम्बन्ध ~~~~

संसार में माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी के सम्बन्ध की तरह गुरु-शिष्य का सम्बन्ध भी एक सम्बन्ध ही है लेकिन अन्य सब सम्बन्ध बन्धन बढ़ाने वाले हैं जबकि गुरु-शिष्य का सम्बन्ध सभी बन्धनों से मुक्ति दिलाता है। यह सम्बन्ध एक ऐसा सम्बन्ध है जो सब बन्धनों से छुड़ाकर अन्त में आप भी हट जाता है और जीव को अपने शिवस्वरूप का अनुभव करा देता है।

 -Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Sunday, 1 May 2016

1434_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

हे रामजी संत में एक भी सदगुण दिखे तो लाभ ले लें। उनमें दोष देखना और सुनना अपने को मुक्तिफल से वंचित करके अशांति की आग में झोंकने के बराबर है।

- श्री वशिष्ठजी महाराज(श्री योग वसिष्ठ महारामायण )

Saturday, 30 April 2016

1433_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

~~~~ संत सान्निध्य ~~~~

जिनका जीवन आज भी किसी संत या महापुरुष के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सान्निध्य में है, उनके जीवन में निश्चिन्तता, निर्विकारिता, निर्भयता, प्रसन्नता, सरलता, समता व दयालुता के दैवी गुण साधारण मानवों की अपेक्षा अधिक ही होते हैं तथा देर-सवेर वे भी महान हो जाते हैं और जो लोग महापुरुषों का, धर्म का सामीप्य व मार्गदर्शन पाने से कतराते हैं, वे प्रायः अशांत, उद्विग्न व दुःखी देखे जाते हैं व भटकते रहते हैं। इनमें से कई लोग आसुरी वृत्तियों से युक्त होकर संतों के निन्दक बनकर अपना सर्वनाश कर लेते हैं।


 -Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Friday, 29 April 2016

1432_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

~~~~~ अहम ब्रह्मास्मि ~~~~~

मैं सब हूँ।मैं विशाल आकाश की नाईं सर्वव्यापक हो रहा हूँ। मैं चिदाकाश-स्वरूप हूँ। सूर्य और चाँद मुझमें लटक रहे हैं।  सब तारे मुझमें टिमटिमा रहे हैं इतना मैं विशाल हूँ। कई राजा-महाराजा इस आकाशस्वरूप चैतन्य में आ-आकर चले गये। मैं वह आकाश हूँ। मैं सर्वव्यापक हूँ। मैं कोई परिस्थिति नहीं हूँ लेकिन सब परिस्थितियों को पहचाननेवाला आधारस्वरूप आत्मा हूँ। आनन्द और शान्ति मेरा अपना स्वभाव है।इस प्रकार अपनी वृत्ति को विशाल... विशाल गगनगामी होने दो।


-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Thursday, 28 April 2016

1431_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

~~~~~ वैराग्यरागरसिको भवः ~~~~~~

उठ जाओ और वैराग्य का आश्रय लो। जैसे साईकल के पहिए निकाल दो तो साईकल चलना मुश्किल है ऐसे ही जीवन से अभ्यास और वैराग्य हटा दो तो प्रभु की यात्रा होना मुश्किल है।

अतः तुम ध्यान का अभ्यास करो और विवेक के साथ अपने भीतर छुपे हुए वैराग्य को जगाकर वैराग्य में ही राग रखो। वैराग्यरागरसिको भवः। संसार के राग से बचकर प्रभु परायण हो जाओ।



-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Wednesday, 27 April 2016

1430_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU


नहिं दरिद्र सम दुख जग माहीं। संत मिलन सम सुख जग नाहीं॥
पर उपकार बचन मन काया। संत सहज सुभाउ खगराया॥


भावार्थ:-जगत् में दरिद्रता के समान दुःख नहीं है तथा संतों के मिलने के समान जगत् में सुख नहीं है। और हे पक्षीराज! मन, वचन और शरीर से परोपकार करना, यह संतों का सहज स्वभाव है॥

Tuesday, 26 April 2016

1429_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

परमात्म-शान्ति

कल की चिन्ता छोड़ दो। बीती हुई कल्पनाओं को, बीती हुई घटनाओं को स्वप्न समझो। आने वाली घटना भी स्वप्न है। वर्त्तमान भी स्वप्न है।
एक अन्तर्यामी अपना है। उसी को प्रेम करते जाओ और अहंकार को डुबाते जाओ उस परमात्मा की शान्ति में।


 -Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu
 

Monday, 25 April 2016

1428_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

सबको स्नेह , सबका मंगल
 
हम अपना देखने का दृष्टिकोण बदल दें तो हमारे लिए यह सारा संसार स्वर्ग से भी सुंदर बन जाय। अपने  पराये का भेद मिट जाय, मेरे तेरे की भावना विलीन हो जाय और सुख का साम्राज्य छा जाय। हम सबको स्नेह दें, सबका मंगल चाहें। 

 -Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu
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