Tuesday, 21 February 2017

1581-Pujya Asaram Bapu Ji | मंगलमय विधान

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मंगलमय विधान- Bapu ji

जब व्यक्ति यह स्वीकार कर लेता है कि जो कुछ हो रहा है, वह मंगलमय विधान से हो रहा है,
तब प्रत्येक परिस्थिति में वह निश्चिन्त तथा निर्भय रहता है।

Monday, 20 February 2017

1580-Pujya Asaram Bapu Ji | विचारशील व तत्वदर्शी बने

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विचारशील व तत्वदर्शी बने- Bapu ji


जिस समय अपने दोष का दर्षन हो जाय, समझ लो कि तुम जैसा विचारशील कोई नहीं। और जिस
समय परदोष दर्षन हो जाय, उस समय समझ लो कि हमारे जैसा कोई बेसमझ नहीं।

Wednesday, 8 February 2017

1579-Pujya Asaram Bapu Ji | अगर साधन मे गति चाहते हो

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अगर साधन मे गति चाहते हो-Bapuji


न्याय अपने प्रति तथा प्रेम एवं क्षमा दूसरों के प्रति करना है। यदि हम ऐसा न करेंगे तो न निर्दोष
हो सकेंगे और न निर्वैर।

Monday, 6 February 2017

1578-Pujya Asaram Bapu Ji | अगर सफल होना है

अगर सफल होना है -Bapu ji


ज्ञानपूर्वक अनुभव करो कि मैं किसी भी काल में देह नहीं हूँ
और न देह मेरा है। आस्था श्रद्धा विश्वास पूर्वक
स्वीकार करो कि अपने में अपने प्रेमास्पद परमेश्वर सदैव
मौजूद हैं। बस, यही सफलताकी कुंजी है।

Saturday, 4 February 2017

1577-Pujya Asaram Bapu Ji | रुचि पूर्त्तिका साधन नहीं है यह शरीर हमारी

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रुचि पूर्त्तिका साधन नहीं है यह शरीर हमारी -Bapu ji


जो लोग यह सोचते हैं कि शरीर हमारी रुचि पूर्त्तिका साधन है, वे कभी भी शांति 
नहीं पाते। उनको कहीं भी, कभी भी शांति नहीं मिलती। शरीर है सेवा सामग्री।
















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जो लोग यह सोचते हैं कि शरीर हमारी रुचि पूर्त्तिका साधन है, वे कभी भी शांति
नहीं पाते। उनको कहीं भी, कभी भी शांति नहीं मिलती। शरीर है सेवा सामग्री।
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