Friday, 26 August 2016

1489_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

मैं भी नहीं और मुझसे अलग अन्य भी कुछ नहीं । साक्षात् आनन्द से परिपूर्ण, केवल, निरन्तर और सर्वत्र एक ब्रह्म ही है । उद्वेग छोड़कर केवल यही उपासना सतत करते रहो ।

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Tuesday, 23 August 2016

1_Krishna Janmashtami 2016

जन्माष्टमी पर हम संकल्प करें कि गीता के संदेश को, योग के संदेश को, आत्मज्ञान के अमृत को हम भी पीयें तथा जगत में भी इस जगदगुरू का प्रसाद बाँटें।

कृष्णं वन्दे जगद् गुरूम्  ।

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

1488_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

सारे धनवान लोग मिलकर एक आदमी को उतना सुख नहीं दे सकते जो सदगुरु निगाह मात्र से सत् शिष्य को दे सकते हैं

  -Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Monday, 22 August 2016

1487_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जिस मनुष्य ने भगवत्प्रेमी संतो के चरणों की धूल कभी सिर पर नहीं चढ़ायी, वह जीता हुआ भी मुर्दा है। वह हृदय
नहीं, लोहा है, जो भगवान के मंगलमय नामों का श्रवण-कीर्तन करने पर भी पिघलकर उन्हीं की ओर बह नहीं जाता।


Shrimad Bhagwat

Friday, 19 August 2016

1486_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

सच्ची समझ

विचारवान पुरूष अपनी विचारशक्ति से विवेक-वैराग्य उत्पन्न करके वास्तव में जिसकी आवश्यकता है उसे पा लेगा। मूर्ख आदमी जिसकी आवश्यकता है उसे समझ नहीं पायेगा और जिसकी आवश्यकता नहीं है उसको आवश्यकता मानकर अपना जीवन खो देगा। उसे चिन्ता होती है कि रूपये नहीं होंगे तो कैसे चलेगा, गाड़ी नहीं होगी तो कैसे चलेगा, अमुक वस्तु नहीं होगी तो कैसे चलेगा।

   -Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Thursday, 18 August 2016

1485_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU


अब तो रुक जाओ 

तुम्हें जितना देखना चाहिए, जितना बोलना चाहिए, जितना सुनना चाहिए, जितना घूमना चाहिए, जितना समझना चाहिए वह सब हो गया। अब, जिससे बोला जाता है, सुना जाता है, समझा जाता है, उसी में डूब जाना ही तुम्हारा फर्ज है। यही तुम्हारी बुद्धिमत्ता का कार्य है, अन्यथा तो जगत का देखना-सुनना खत्म न होगा.... स्वयं ही खत्म हो जायेंगे.....। इसलिए कृपा करके अब रुको। .....हाँ रुक जाओ.... बहुत हो गया। भटकने का अन्त कर दो।


  -Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Wednesday, 17 August 2016

1484_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

 पुरुषार्थ क्या है? उससे क्या पाना है?

ज्ञानवान जो संत हैं और सत्शास्त्र में  जो ब्रह्मविद्या है उसके
अनुसार प्रयत्न करने का नामपुरुषार्थ है और पुरुषार्थ से पाने 
योग्य आत्मज्ञान है जिससे जीव संसार समुद्र से पार होता है।


  -Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

Monday, 15 August 2016

1482_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

श्री वशिष्ठ जी महाराज कहते हैं- 'हे राम जी! तृष्णावान के हृदय में संत के वचन नहीं ठहरते। तृष्णावान  से तो वृक्ष भी भय पाते हैं' इच्छा-वासना-तृष्णा आदमी की बुद्धि को दबा देती है

-श्री वशिष्ठ जी महाराज

Sunday, 14 August 2016

1481_THOUGHTS AND QUOTES GIVEN BY PUJYA ASHARAM JI BAPU

जिस प्रकार धुआँ सफेद मकान को काला
कर देता है, उसी प्रकार विषय-विकार
एवं कुसंग नेक व्यक्ति का भी पतन कर देते है।


 -Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu
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